मेरे अनन्य : डॉ. क्षमा शंकर पाण्डेय
SHIV SHANKAR MISHRA
अक्टूबर 15, 2026
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आखिरकार वह नौबत आ ही गयी, जिसकी कभी कल्पना नहीं की थी। ...अकस्मात् मरण! फिर संस्मरण। एक मित्र का मरण और दूसरे का संस्मरण...! बहुत आत्मीय लोग...
कुछ शब्दचित्र हैं यहाँ। विकास की अन्धी दौड़ में ये हाशिये की आख्यायें हैं और आख्यान भी!