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'सतगुर हमसूँ रीझि करि', सन्दर्भ : प्रो0 रामनारायण शुक्ल

वह 30 जुलाई, 1983 का दिन था, जब मैं पीएच.डी. में प्रवेश के लिए 

मुनुआ की वीरगति

सुबह-सुबह गाँव में बमचख मच गया। मुनुआ चलते ट्रक से कूद पड़ा  और  

जरइ रे नउआ तोर नउअरिया जरइ पंडिता तोर बेद!

ज्या दातर पारम्परिक नारी गीतों में जीवन के जो चित्र मिलते हैं, वे