हजारों गद्य-कविताओं का कोलाज रचतीं बहुविमर्शी कहानियाँ... शिवशंकर मिश्र का 'अन्तिम उच्चारण' - रामप्रकाश कुशवाहा
समकालीन कथाकारों में शिवशंकर मिश्र को विरल और अद्वितीय बनाने वाली विशेषता
कुछ शब्दचित्र हैं यहाँ। विकास की अन्धी दौड़ में ये हाशिये की आख्यायें हैं और आख्यान भी!