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मेरे अनन्य : डॉ. क्षमा शंकर पाण्डेय

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आखिरकार वह नौबत आ ही गयी, जिसकी कभी कल्पना  नहीं की थी।

जब-जब देखा : सन्दर्भ नामवर सिंह

नामवर जी पर लिखने के लिए मैं

स्मृति-प्रदीप

प्रिय ज्योत्स्ना, स्नेह! प्रदीप पर लिखना काफी मुश्किल  

'सतगुर हमसूँ रीझि करि', सन्दर्भ : प्रो0 रामनारायण शुक्ल

वह 30 जुलाई, 1983 का दिन था, जब मैं पीएच.डी. में प्रवेश के लिए 

स्मृति में कामतानाथ- शिवशंकर मिश्र

कामतानाथ जी का नाम तो पहले से

स्मृति में गोरख - शिवशंकर मिश्र

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शायद वह सन् अस्सी की गर्मियों की कोई दोपहर थी, जब मैं पहली बार दिल्ली पहुंचा
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