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1857 : सामासिकता का लोकपाठ - शिव शंकर मिश्र

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स मास संस्कृत व्याकरण की एक व्यवस्था 

"बादल को घिरते देखा है' (नागार्जुन) और "मेघदूतम् (कालिदास)

"मेघदूतम्" संस्कृत गीतिकाव्य परम्परा का वह सृजन है, जिसने न सिर्फ
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