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अवधी कवि पं. रामगुलाम त्रिपाठी

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अरिनाशक-दुर्गाशतकम् पं. रामगुलाम त्रिपाठी इलाहाबाद जनपद के कवि

पाठ और पुनः पाठ- शिवशंकर मिश्र का 'अन्तिम उच्चारण'- यथार्थ की महाकाव्यात्मक प्रस्तुति करती बहुविमर्शी कहानियों का संवेदनाधर्मी कथा-लोक

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अपने प्रकाशन के लगभग छः-सात वर्ष बाद शिवशंकर मिश्र 

सुधीर विद्यार्थी के '(मेरे) हिस्से का शहर'

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अन्धाधुन्ध विकास और भूमण्डलीकरण के नाम पर स्थानीयताओं के विनाश के इस दौर में

स्नान का फल : एक पुनर्मूल्यन

पाण्डेय बेचन शर्मा 'उग्र' के साहित्य की उग्रता

हजारों गद्य-कविताओं का कोलाज रचतीं बहुविमर्शी कहानियाँ... शिवशंकर मिश्र का 'अन्तिम उच्चारण' - रामप्रकाश कुशवाहा

समकालीन कथाकारों में शिवशंकर मिश्र को विरल और अद्वितीय बनाने वाली विशेषता

जरइ रे नउआ तोर नउअरिया जरइ पंडिता तोर बेद!

ज्या दातर पारम्परिक नारी गीतों में जीवन के जो चित्र मिलते हैं, वे 

‘कथादेश’ मासिक फरवरी 2020 अंक में प्रकाशित कहानी ‘जश्न’ की समीक्षा - डॉ. निशाकान्त द्विवेदी,

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