पाठ और पुनः पाठ- शिवशंकर मिश्र का 'अन्तिम उच्चारण'- यथार्थ की महाकाव्यात्मक प्रस्तुति करती बहुविमर्शी कहानियों का संवेदनाधर्मी कथा-लोक
अपने प्रकाशन के लगभग छः-सात वर्ष बाद शिवशंकर मिश्र
कुछ शब्दचित्र हैं यहाँ। विकास की अन्धी दौड़ में ये हाशिये की आख्यायें हैं और आख्यान भी!