संदेश

पखावज वृत्तान्त- शिवशंकर मिश्र

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महाराज इन्द्र के दरबार में संगीत की सभा

स्मृति में गोरख - शिवशंकर मिश्र

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शायद वह सन् अस्सी की गर्मियों की कोई दोपहर थी, जब मैं पहली बार दिल्ली पहुंचा

मूरतें -शिवशंकर मिश्र

एक पुरानी धार्मिक इमारत ढहा दी गयी थी और उससे भी पुरानी एक दूसरी

बाबा की उघन्नी- शिवशंकर मिश्र

   बारात आयी भी और चली भी गयी। सारा तामझाम

अंतिम उच्चारण - शिवशंकर मिश्र

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दस साल का हो जाने पर भी जब तीसरा लड़का बोलने की बजाय महज इशारे करता
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